ब्लैक टाइगर रविंद्र कौशिक की गुमनाम कहानी जिन्होंने देश के लिए दी कुर्बानी…

अजब गजब

डिजिटल नेटवर्क /सत्य का सामना / रविंद्र कौशिक ” ब्लैक टाइगर ” के नाम से मशहूर भारत के उन अनसुने सिपाही जिन्होंने देश की खातिर अपनी जान कुर्बान कर दी….

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11 अप्रैल 1952 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्मे रवींद्र का बचपन नाटकों और अभिनय के जुनून से भरा था; स्कूल और कॉलेज के स्टेज पर वे इतनी सहजता से किरदार निभाते थे कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते। यही शौक 1973 में उनकी किस्मत बदल गया, जब एक नाटक में पाकिस्तानी अधिकारी का रोल अदा करते हुए उनकी जबरदस्त एक्टिंग ने RAW के एक अधिकारी का ध्यान खींचा। प्रभावित होकर RAW ने उन्हें भर्ती किया और दो साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद पाकिस्तान भेजा।

 

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पाकिस्तान में रवींद्र ने अपना नाम, धर्म और पहचान बदलकर बन गए नबी अहमद शाकिर, उर्दू सीखी, इस्लाम अपनाया और पाकिस्तान में दाखिल होकर एलएलबी की पढ़ाई की। उन्होंने पाकिस्तानी सेना में भर्ती होकर कुछ ही सालों में मेजर रैंक हासिल की और हर दिन संवेदनशील सैन्य योजनाओं, सेना की तैनाती और गुप्त ऑपरेशनों की जानकारी भारत को भेजते रहे। 1979 से 1983 तक उनके मिशनों ने कई बड़े हमलों को पहले ही रोकने में मदद की।

 

लेकिन जासूसी की दुनिया में एक छोटी सी गलती जान ले लेती है। 1983 में एक अन्य भारतीय जासूस की लापरवाही के कारण रवींद्र पकड़े गए। उनके माता-पिता और भाई-बहनों को जब यह खबर मिली, तो उनके लिए यह सदमा शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वर्षों तक उन्हें नहीं पता था कि उनका बेटा, भाई पाकिस्तान में किस खतरनाक मिशन पर है और कब लौटेगा। जेल में रवींद्र ने परिवार को चुपके से कुछ पत्र भेजे, जिनमें उन्होंने अपनी गिरती सेहत, दर्द और यह सवाल लिखा कि, “क्या भारत जैसे बड़े देश के लिए कुर्बानी देने वाले को यही हासिल होता है?”

 

रवींद्र की मौत 21 नवंबर 2001 को पाकिस्तानी जेल में बीमारी और कमजोर शरीर के कारण हुई। उनके परिवार को न तो उनकी लाश मिली, न ही भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सम्मान या सम्मान समारोह। आज भी उनके भाई-बहन कहते हैं कि उनकी पीड़ा सिर्फ यह नहीं थी कि उन्होंने रवींद्र को खो दिया, बल्कि यह भी कि भारत सरकार ने उनके बलिदान को खुलकर स्वीकार नहीं किया, जिससे परिवार को उनके वीर पुत्र पर गर्व व्यक्त करने का मौका भी नहीं मिला।

 

यह कहानी सिर्फ जासूसी की नहीं है। यह है खामोश बलिदान, अदृश्य बहादुरी और देशभक्ति की कहानी, साथ ही परिवार की अनकही पीड़ा की कहानी। एक साधारण लड़के का असाधारण सफर। स्टेज की लाइट्स से जासूसी की अंधेरी गलियों तक, रोमांच और साहस से भरा।

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