न्यूज़ नेटवर्क। सत्य का सामना। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वयंभू संत रामपाल को देशद्रोह के एक मामले में जमानत दे दी है। रामपाल को 11 साल बाद जमानत मिली है और इस फैसले से उनके समर्थक में खुशी की लहर है। साल 2014 से संत रामपाल हरियाणा के हिसार जेल में बंद है..
रामपाल एक भारतीय आध्यात्मिक उपदेशक और सतलोक आश्रम के संस्थापक हैं. उनका जन्म 1951 में हरियाणा, भारत में हुआ था. धार्मिक नेता बनने से पहले, उन्होंने सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के रूप में काम किया. उन्होंने भगवद गीता, कबीर सागर और अन्य धर्मग्रंथों की व्याख्याओं के आधार पर आध्यात्मिक शिक्षाओं का प्रचार करना शुरू किया. वे 15वीं शताब्दी के संत कबीर की शिक्षाओं का पालन और प्रचार करने का दावा करते हैं. उनके अनुयायी उन्हें एक संत (आध्यात्मिक गुरु) मानते हैं और भक्ति और मोक्ष के उनके दृष्टिकोण में विश्वास करते हैं..
क्या हैं रामपाल से जुड़े विवाद?
साल 2006 में हरियाणा में रामपाल के अनुयायियों और एक अन्य धार्मिक समूह के बीच झड़पें हुईं, इस घटना की वजह से वह चर्चा में आ गए थे. इसके बाद साल 2014 में हिसार स्थित उनके आश्रम में पुलिस के साथ हिंसक गतिरोध हुआ था, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस को तब रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. रामपाल पर गैरकानूनी कारावास बनाने और लोगों को प्रताडि़त करने जैसे कई गंभीर आरोप लगे हैं, और कुछ मामलों में अदालतों ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया है. विवादों के बावजूद, भारत भर में विशेषकर उत्तरी राज्यों में उनके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं. उनका संगठन आश्रम चलाता है और पुस्तकों, टीवी चैनलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से शिक्षाओं का प्रसार करता है.
