नर्स निमिषा प्रिया को फांसी, क्या भारत सरकार इस फैसले को रोक पायेगी?

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यमन: केरल का एक परिवार अभी गहरी निराशा में डुबा हुआ है. एक ऑटोरिक्शा चालक अपनी पत्नी की जान की भीख मांग रहा है, एक 12 साल की बेटी अपनी मां को लौटा देने की फरियाद कर रही है. दरअसल यमन में हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को फांसी दी जानी है जिसे रोकने के लिए भारत पुरजोर प्रयास कर रहा है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद जॉन ब्रिटास ने भी विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर उनसे यमन में शीर्ष स्तर के अधिकारियों के साथ संपर्क कर निमिषा प्रिया की फांसी को तुरंत रोकने का आग्रह किया है..

 

 

मूल रूप से केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेनगोडे की रहने वाली निमिषा प्रिया अपने दिहाड़ी कमाने वाले माता-पिता को सपोर्ट करने के लिए अपने पति और बेटी के साथ 2008 में यमन चली गई. लेकिन पति और बेटी वित्तीय कारणों से 2014 में भारत लौट आए. उसी वर्ष, यमन गृहयुद्ध की चपेट में आ गया और वे वापस नहीं जा सके क्योंकि देश ने नए वीजा जारी करना बंद कर दिया था. निमिषा ने अलग-अलग अस्पतालों में काम करने के बाद उसने पार्टनरशिप में अपना क्लिनिक खोलना चाहा…

 

 

निमिषा की मां प्रिया द्वारा दायर याचिका में कहा गया था, “कुछ समय बाद, निमिषा का क्लिनिक शुरू हुआ, लेकिन मेहदी ने क्लिनिक के स्वामित्व वाले कागजातों में हेरफेर किया. उसने सभी को यह बताकर मासिक कमाई से पैसे निकालना शुरू कर दिया कि निमिषा उसकी पत्नी है. निमिषा ने आरोप लगाया था कि मेहदी उसे और उसके परिवार को सालों से परेशान कर रहा था. मेहदी ने उसका पासपोर्ट भी अपने पास रख लिया और यह सुनिश्चित किया कि वह यमन नहीं छोड़ेगी. उसने ड्रग्स के प्रभाव में उसे प्रताड़ित किया. उसने कई बार बंदूक की नोक पर उसे धमकी दी. उसने क्लिनिक से सारे पैसे और उसके गहनों को ले लिया.”

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