ब्यूरो रिपोर्ट/ पूरी दुनिया में 195 देश हैं जिनमें से 193 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश हैं और दो गैर-सदस्य पर्यवेक्षक देश शामिल हैं. इन 195 देशों में से सिर्फ 9 देशों के पास ही परमाणु बम की क्षमता है और आधिकारिक तौर पर सिर्फ एक देश अमेरिका ने ही इसका अभी तक इस्तेमाल किया है. चाहे इजरायल और फिलिस्तीन की जंग हो या रूस और यूक्रेन की, कभी भी परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं किया गया..
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और युद्ध के दौरान भी कभी परमाणु बम के इस्तेमाल की हिमाकत नहीं की गई क्योंकि अमेरिकी परमाणु बम ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहर में जो नुकसान किया था उसकी छाप आज भी देखने को मिलती है. चलिए आपको बताते हैं कि अगर आपने कभी आपने परमाणु बम को फटते हुए देख लिया तो आपके साथ क्या होगा…

Nuclear Bomb Blast: परमाणु बम (एटम बम) या न्यूक्लियर बम दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक है, जो पल भर में लाखों लोगों की जान ले सकता है। यह बम यूरेनियम या प्लूटोनियम जैसे खास पदार्थों से बनता है। जब ये पदार्थ टूटते हैं तो इस क्रिया को न्यूक्लियर फिशन कहते हैं, जो परमाणु बम में होती है। वहीं, जब ये पदार्थ मिलते हैं तो न्यूक्लियर फ्यूजन होता है, जिसे थर्मोन्यूक्लियर बम (हाइड्रोजन बम) कहते हैं। न्यूक्लियर बम से ज्यादा तबाही थर्मोन्यूक्लियर बम से होती है। हालांकि पाकिस्तान के पास ये बम होने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

जब न्यूक्लियर विस्फोट होता है तो बहुत ज्यादा ऊर्जा निकलती है। यह ऊर्जा इतनी ताकतवर होती है कि एक छोटा सा बम पूरे शहर को तबाह कर सकता है। यह ऊर्जा सूरज की तरह गर्मी और रोशनी पैदा करती है, लेकिन इसका असर जानलेवा होता है।
तीन प्रकार से नुकसान पहुंचाता है परमाणु बम
परमाणु बम विस्फोट तीन तरीके से नुकसान पहुंचाता है। पहला जब बम फटता है, तो बहुत तेज हवाएं और दबाव की लहरें निकलती हैं। ये हवाएं 1000 किलोमीटर प्रति घंटा से भी तेज हो सकती हैं। यह ऐसा है जैसे कोई विशाल तूफान आ जाए, जो इमारतें, पेड़, गाड़ियां, और हर चीज को पल में उड़ा दे। दूसरा बम से निकलने वाली गर्मी सूरज जितनी गर्म (6000-7000 डिग्री सेल्सियस) होती है। यह गर्मी लोगों की त्वचा को जला देती है, कपड़ों और पेड़ों में आग लगा देती है, और आसपास की चीजें पिघला देती है।
तीसरा नुकसान सबसे बड़ा और काफी लंबा होता होता है। तीसरा नुकसान रेडिएशन का होता है इसमें बम फटने के बाद हवा में एल्फा, बीटा और गामा जैसे जहरीले कण फैलते हैं। ये कण हवा, पानी, और मिट्टी को जहरीला कर देते हैं। अगर कोई इनके संपर्क में आए, तो उसे कैंसर, खून की बीमारी, या दूसरी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ये रेडिएशन लंबे समय तक खतरा बना रहता है।
फैट मैन और लिटिल बॉय
6 अगस्त 1945 — मानव इतिहास का वह काला दिन, जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया. तीन दिन बाद नागासाकी पर दूसरा हमला हुआ. दोनों शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गए…

पल भर में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग मारे गए, लेकिन इस तबाही की भयावहता यहीं नहीं रुकी.इसके ज़हरीले निशान आने वाले दशकों तक इंसानों को निगलते रहे. इतिहास में इंसान का इंसान पर किया गया यह सबसे बड़ा और निर्मम अपराध था, जिसका जिम्मेदार अमेरिका था।
‘फैट मैन’ और ‘लिटिल बॉय’ – ये थे वो दो परमाणु बम, जिन्हें अमेरिका ने तैयार किया था और जिन्होंने इंसानी इतिहास की सबसे भयावह तबाही को अंजाम दिया. इन्हें बनाने वाले वैज्ञानिक रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने बम गिरने के बाद कहा था कि मेरे हाथ खून से सने हैं…
हिरोशिमा पर विस्फोट इतना भीषण था कि महज एक मिनट में शहर का 80 प्रतिशत हिस्सा राख में बदल गया, जो लोग बच भी गए, उन्हें विकिरण की जहरीली लहरों और ‘काली बारिश’ ने अपनी चपेट में ले लिया. बाद में हजारों लोग कैंसर, ल्यूकीमिया और अन्य भयानक बीमारियों का शिकार हुए…

जो इस परमाणु तूफान में जिंदा रह गए, उनकी जिंदगी भी किसी सजा से कम नहीं थी. ये लोग ‘हिबाकुशा’ कहलाते हैं. जापानी भाषा का एक शब्द, जिसका अर्थ है ‘विस्फोट से प्रभावित व्यक्ति’.हिबाकुशा ना सिर्फ पीढ़ी दर पीढ़ी विकिरण जनित बीमारियों से जूझते रहे, बल्कि समाज के तिरस्कार के शिकार भी बने, उन्हें बीमारी का सोर्स माना गया.बीबीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि आज भी जापान में कई लोग हिबाकुशा से विवाह करने से कतराते हैं. उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया.
BBC की एक डॉक्यूमेंट्री में 86 वर्षीय मिचिको कोडमा का इंटरव्यू है. एक ‘हिबाकुशा’, जिन्होंने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिरने की त्रासदी खुद अपनी आंखों से देखी और सही है.मिचिको कहती हैं कि जब मैं आज दुनिया में चल रहे जंग के बारे में सोचती हूं.मेरा शरीर कांप उठता है… और आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं. हम परमाणु बमबारी के उस नरक को दोबारा नहीं दोहरा सकते. मुझे संकट का एहसास हो रहा है.
बीबीसी की रिपोर्ट में एक हिबाकुशा का बयान है, जो उस दिन की दर्दनाक लम्हे को आज भी नहीं भूल पाए हैं. वे कहते हैं कि जो कुछ भी मैंने देखा… वो किसी नरक से कम नहीं थाॉ. लोग हमारी ओर भाग रहे थे, उनके शरीर पिघल रहे थे, मांस लटक रहा था. बुरी तरह झुलसे हुए लोग दर्द से कराह रहे थे. उनकी चीखे बचाओ बचाओ कह रही थी वो मंजर वो दृश्य कभी न देखने वाला था ….
