छत्तीसगढ़, रायपुर समेत देशभर में आज नरक चतुर्दशीयानी छोटी दिवाली मनाया जा रही है. यह त्योहार दीपावली से ठीक एक दिन पहले कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है और अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है.

त्योहार दीपावली से ठीक एक दिन पहले कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है और अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
नरक चतुर्दशी का पौराणिक आधार: पंडित राजन उपाध्याय बताते हैं कि नरक चतुर्दशी के इस त्योहार के पीछे की सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है. मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली और अहंकारी राक्षस का वध किया था..
नरकासुर ने 16000 से अधिक कन्याओं को बंदी बना रखा था और देवताओं को भी परेशान किया हुआ था. जब उसके अत्याचार सहन से बाहर हो गए, तब भगवान कृष्ण ने माता सत्यभामा के सहयोग से नरकासुर का वध किया और सभी कन्याओं को मुक्त कराया. इस विजय के कारण इस तिथि को नरक चतुर्दशी कहा जाने लगा.
अकाल मृत्यु का भय होता है दूर:पंडित राजन उपाध्याय बताते हैं कि इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है. इसमें तिल या सरसों के तेल में हल्दी, तिल आदि मिलाकर पूरे शरीर पर मालिश करके स्नान किया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से पापों का नाश और शरीर में तेज बढ़ता है.
“संध्या के समय घर की दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का एक दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और नर्क के दुखों से मुक्ति मिलती है.”- पंडित राजन
