डिजिटल डेस्क/सत्य का सामना/ दीपावली की शुरुआत धनतेरस से होती है, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। आज यानी 18 अक्टूबर को धनतेरस है। ये दिन आरोग्य, दीर्घायु और धन-समृद्धि का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों में वर्णन है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। इसके साथ ही भगवान कुबेर और यमराज की आराधना करने का भी विधान है। जहां कुबेर की पूजा से धन और सौभाग्य मिलता है, वहीं यमराज की पूजा अकाल मृत्यु से रक्षा करती है। इस तरह धनतेरस को आरोग्य और समृद्धि का आरंभिक पर्व कहा जाता है.

भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि
धनतेरस के दिन प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। उत्तर-पूर्व दिशा में बैठकर उनकी पूजा करना शुभ माना गया है। सबसे पहले दीपक के नीचे खील या चावल रखें और फिर दीपक जलाएं। इसके बाद एक कलश में शुद्ध जल लेकर भगवान को अर्पित करें और रोली, कुमकुम, हल्दी, फूल, पान, फल, मिष्ठान आदि से पूजा करें। इस दौरान “ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः” मंत्र का जाप करते रहें। यह मंत्र रोगों से मुक्ति और दीर्घायु प्रदान करने वाला माना गया है।
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