राजधानी रायपुर / सत्य का सामना / अभी अभी राजधानी रायपुर से एक ताज़ा खबर सामने आई है, छत्तीसगढ़ी, हारर, सस्पेंस फ़िल्म दंतेला के सभी शो को निरस्त कर दिया है , निरस्त करने के कारणों का पता तो चल नहीं पाया है लेकिन क्या छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी फिल्मो के शो को कैंसल करना साजिश या कुछ और? फ़िल्म के निर्देशक, निर्माता, कलाकारों ने मिडिया के सामने आ कर अपनी बात रखी और सरकार और सिनेमा वितरको पर सवाल उठाये, निर्देशक और कलाकारों ने कहाँ की सभी प्रदेश में स्थानीय फिल्मों को एक महीना या कम से कम दिन में दो शो का नियम है लेकिन छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी फिल्मों के साथ भेदभाव किया जा रहा है….

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख बीफरे
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल ने सरकार एवं सिनेमा वितरको पर तंज कसते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है उन्होंने कहाँ की स्थानीय फिल्मों के साथ भेदभाव उचित नहीं है, हिंदी और दूसरी फिल्मों को अधिक शो मिलते है जबकि क्षेत्रीय फिल्मों के साथ भेदभाव किया जाता है यह कही से भी उचित नहीं है अगर छत्तीसगढ़ में यही की फिल्मों को बढ़ावा नहीं मिलेगा तो कहाँ मिलेगा, उन्होंने कहाँ की अगर यहाँ की फिल्मों को बढ़ावा नहीं मिला तो पार्टी सड़को पे आंदोलन करेगी…..

दंतेला विशुद्ध रूप से हारर, सस्पेंस, दंतकथा पे आधारित छत्तीसगढ़ी फ़िल्म है फ़िल्म के ट्रेलर ने ही दिखा दिया था की फ़िल्म कुछ बड़ा करेगी, फ़िल्म पंडित, समीक्षकों ने फ़िल्म को सराहा था।
29 अगस्त को फ़िल्म छत्तीसगढ़ में पुरे मल्टीप्लेक्स सहित सिनेमाघरो में रिलीज की गई थी और अचानक ही इसे सिनेमाघरो से निकाल दिया गया वजह बहुत से हो सकते है लेकिन जिस तरह से बड़े निर्देशकों और समीक्षको ने फ़िल्म को सराहा था और फ़िल्म को सिनेमाघरो से निकालना एक सवाल पैदा करता है क्या राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सपोर्ट नहीं करती है चुकी प्रत्येक राज्य में सरकारों को क्षेत्रीय फिल्मो को चलाने के अलग अलग नियम है……
क्षेत्रीय फिल्मों को बढ़ावा
क्षेत्रीय फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए, पश्चिम बंगाल जैसी राज्य सरकारें सिनेमाघरों में उनके प्रदर्शन को बढ़ावा देने के लिए नियमों और अधिसूचनाओं का उपयोग करती हैं, जिसमें प्राइम टाइम स्लॉट आरक्षित करना, तथा अनुदान और सब्सिडी प्रदान करना शामिल है, जैसा कि उत्तराखंड राज्य ने अपनी फिल्म नीति 2024 में किया है. हालाँकि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) फिल्मों को प्रमाणित करता है, राज्य सरकारें प्रदर्शन पर नियंत्रण रखती हैं, और सार्वजनिक प्रदर्शन के नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई भी कर सकती हैं…
नियम और अधिसूचनाएँ:
पश्चिम बंगाल सरकार ने सिनेमाघरों को निर्देश दिया है कि वे प्राइम टाइम (दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक) में बंगाली फिल्मों के लिए कम से कम एक शो आरक्षित करें.
अनुदान और सब्सिडी:
उत्तराखंड सरकार ने अपनी फिल्म नीति 2024 के तहत क्षेत्रीय और बाल फिल्मों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए फिल्म निर्माताओं को अनुदान और सब्सिडी प्रदान की है.
फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देना:
कुछ राज्य सरकारें स्थानीय फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए भी नियम बना सकती हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और राजस्व सृजन को बढ़ावा मिले.
