सत्य का सामना: छत्तीसगढ़ का पारंपरिक और प्रसिद्ध त्योहार पोला न केवल इस राज्य में, बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है. यह पर्व विशेष रूप से किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए समर्पित है, जिसमें उनके सबसे महत्वपूर्ण साथी, बैलों की पूजा की जाती है. इस साल बैल पोला का त्यौहार 23 अगस्त को मनाया जाएगा. भारत, जो कि एक कृषि प्रधान देश है, में बैल सदियों से खेती के अभिन्न अंग रहे हैं. किसान बैलों की मदद से खेत की जुताई करते हैं और अन्न बोते हैं, जिससे धरती हरी-भरी हो जाती है. गाय और बैल को लक्ष्मी के रूप में देखा जाता है, और इन्हें सदैव पूजनीय माना गया है। पोला के इस पावन पर्व में बैलों की पूजा की जाती है…

त्योहार की परंपराएं:
बैलों का साज-सज्जा और पूजा:
किसान अपने बैलों को नहलाते हैं, सजाते हैं, माथे पर चंदन लगाते हैं और उन्हें मालाएं पहनाते हैं.
खास पकवान:
इस दिन ठेठरी और खुर्मी जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं.
बच्चों के लिए खिलौने:
बच्चों को मिट्टी के बैल और अन्य खिलौने दिए जाते हैं, जिन्हें वे घर-घर जाकर दिखाते हैं और दक्षिणा पाते हैं.
बैलों की दौड़:
कुछ जगहों पर बैलों की दौड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है.
पारंपरिक खेल:
गांवों में युवक-युवतियां और बच्चे मैदान में पारंपरिक खेल खेलते हैं.
