नई दिल्ली /डिजिटल नेटवर्क/ निठारी हत्याकांड के दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार कर ली, जिसके बाद अब वह जेल से बाहर आ सकेंगे, क्योंकि बाकी सभी मामलों में वह पहले ही बरी हो चुके हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने दिया, जिसने कोली की याचिका पर खुले कोर्ट में सुनवाई की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बेहद दुख की बात है कि लंबी जांच के बावजूद निठारी के जघन्य हत्याकांड के असली अपराधी की पहचान कानूनी मानकों के अनुरूप स्थापित नहीं हो पाई। अपराध जघन्य थे और परिवारों की पीड़ा अथाह थी। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के निठारी हत्याकांड से जुड़े अंतिम लंबित मामले में सुरेंद्र कोली को बरी करते हुए यह टिप्पणी की।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने फैसले में कहा, आपराधिक कानून अनुमान या पूर्वधारणा के आधार पर दोषसिद्धि की अनुमति नहीं देता। खुदाई शुरू होने से पहले घटनास्थल को सुरक्षित नहीं किया गया था, खुलासे को उसी समय दर्ज नहीं किया गया। रिमांड दस्तावेज में विरोधाभासी विवरण थे और कोली को समय पर अदालत की ओर से निर्देशित चिकित्सा जांच के बिना लंबे समय तक हिरासत में रखा गया। पीठ ने कहा, हम अंतिम परिणाम के प्रति सचेत हैं। हम इस बात से भी अवगत हैं कि उपचारात्मक राहत अपवाद के तौर पर और संकीर्ण आधार पर दी जा रही है। मौजूदा मामला कठोर सीमा क
कौन हैं सुरेंद्र कोली?
सुरेंद्र कोली 2006 के नोएडा निठारी कांड में मुख्य आरोपी थे। उस वक्त निठारी गांव में बच्चों के गायब होने और फिर उनके शवों के मिलने से पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। जांच एजेंसियों ने कोली और उनके नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंधेर को गिरफ्तार किया था। कोली को कई मामलों में दोषी ठहराया गया और उन्हें फांसी की सजा भी सुनाई गई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया।
18 साल बाद आया फैसला
कोली ने अपनी सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब अदालत ने उन्हें बरी करते हुए कहा कि न्याय का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना है।
कोली अब आजाद
सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धि के खिलाफ सुधारात्मक याचिका को मंजूर कर लिया था। हत्या व दुष्कर्म के मामले में फरवरी, 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। पर, इलाहाबाद हाईकोर्ट के 12 मामलों में बरी किए जाने के आदेश के बाद उसने फिर सुधारात्मक याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने कोली को बरी करते हुए उसकी दोषसिद्धि रद्द करते हुए तत्काल रिहाई के आदेश दिए।
क्या है निठारी कांड
निठारी गांव में रहने वाले बच्चे वर्ष 2004 से लापता हो रहे थे। बच्चों के लापता होने की जानकारी उनके परिजन थाना सेक्टर-20 पुलिस से लेकर बड़े पुलिस अधिकारियों तक से कर रहे थे। लेकिन पुलिस गुमशुदगी लिखने के बजाए उन्हें दुत्कार कर भगा देती थी। गायब होने वाले बच्चों में अधिकतर लड़कियां थीं। पायल नाम की एक युवती भी निठारी की पानी की टंकी के पास से लापता हो गई। उसके पिता सेक्टर-19 में रह रहे नंदलाल ने डी-5 सेक्टर-31 कोठी के मालिक व जेसीबी के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर मोनिंदर सिंह पंधेर पर बेटी के अपहरण का शक जाहिर करते हुए पुलिस से शिकायत की।
